*अभी तो हमें और जलील होना है_*



अभी तो हमें और जलील होना है_

जय हिंद साथियों,
आजकल सारे बड़े नेता 15 साल बनाम 15 साल कर रहे हैं, हमने सोचा इस ज्ञान के सागर में एक लोटा हम भी डाल दें,
जनता भी बोले नेता ही क्यों
साथियों लोकतंत्र में तीन स्तंभ माने जाते हैं विधायिका , कार्यपालिका और न्यायपालिका
पहले 15 साल में, विधायिका कार्यपालिका पर चढ़ी रही, DM खैनी बनाते रहें,
नीतीश जी के 15 साल में विधायिका लगभग रबर स्टैंप बन गई, सर आपने सुना होगा कि दरोगा विधायक की नहीं सुनता मंत्री अपने मंत्रालय में सिवाय ट्रांसफर पोस्टिंग के कुछ नहीं करा पाता
वैसे बिहार के छोटे से बड़े संस्थाओं को आप अगर ध्यान से देखेंगे तो यह देखेगा कि चेयरमैन या जो प्रमुख होता है संस्था के सारे सदस्य रबर स्टैंप ही रखता है ताकि यह मामला उसका पारिवारिक मामला हो जाए,
बिहार की जितनी पुरानी सामाजिक संस्थाएं हैं उनको देखेंगे तो आपको मेरी बात की सच्चाई मालूम पड़ेगी, चेयरमैन और उनके अगल-बगल बैठे हुए रबर स्टैंप जो चेयरमैन की हर बात पर हां बोले
अब आप अपने अपने विधायकों को ले लीजिए क्या वह सही में independent thinker काबिल आदमी हैं या सिर्फ आपने उन्हें मुख्यमंत्री के नाम पर चुना है
और मुख्यमंत्री ने उन्हें जात या दूसरे समीकरण के बेसिस पर टिकट दिया है ताकि सब कुछ मैनेज होता रहे
साथियों जब पाटलिपुत्र के वक्त कोई व्यक्ति पाटलिपुत्र से अफगानिस्तान जाता होगा तो लोग रास्ते में कहते होंगे कि देखो सम्राट का आदमी आ रहा है या शासक आ रहा है
आज तो पंजाब पहुंचते-पहुंचते बिहारियों के अनेक नाम हो जाते हैं
बहुत कष्ट से हम लोग पाटलिपुत्र से पटना तक पहुंचे हैं, और जैसा माहौल देख रहा हूं मुझे लगता है अभी तो हमें और जलील होना है
अभी भी न सुधरे हैं ना सुधरेंगे फिर जलालत झेल लेंगे
जय हिंद मजे कीजिए




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