आज विदा हो गया मेरा जवानी का साथी, कलकत्ता फ्लैट पे पड़े पड़े सड़ रहा था, आज विद…

आज विदा हो गया मेरा जवानी का साथी, कलकत्ता फ्लैट पे पड़े पड़े सड़ रहा था, आज विदा कर दिए, ना जाने कितने bikes को नया जीवन देगा
याद नही कितने kms हम साथ दौड़े होंगे, golden quadrangle का कोलकाता बालासोर का हिस्सा बनते हुए देखा हमने, दीघा और खरगपुर तो दिखता था तुम्हारी सीट पे बैठते ही
ना जाने कितनो के पिता तुम्हारी रफ्तार से दुखी हुए होंगे दोस्त, कइयों को बोला की ले जाओ चलाते रहो, कोई हिम्मत नहीं किया तुमपे सवार होने दोस्त
अलविदा, शुक्रिया
So long so good







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