गड़ेरिया आएगा, दाना डालेगा, जाल बिछाएगा : कभी ज्योति के बाप की जगह बैठकर सोचिए…

गड़ेरिया आएगा, दाना डालेगा, जाल बिछाएगा : कभी ज्योति के बाप की जगह बैठकर सोचिए
साथियों बहुत जरूरी है समझना नितीश कुमार का "FAILURE MANAGEMENT" और बिहार के राजनेताओं की चाल को
आप में से कितनों को याद है बिहार के DNA testing ? कौन-कौन थूका था या यहां वहां का बाल दिया था ?
दशरथ मांझी जी को कितने साल लगे थे वह सड़क काटने में ?
क्या उस सड़क से होने वाली सुगमता को visualise करना सरकार और उसके अधिकारियों का काम नहीं था ?
क्या सालों तक माझी ही सड़क काटते रहे किसी अधिकारी और जनप्रतिनिधि का नजर नहीं पड़ा उन पर ?
इतना बड़ा संस्कारी तंत्र, इतना बड़ा लोकतंत्र, सब fail ? कहां था लोक और कहां था तंत्र ?
और फिर शुरू हुआ फिर failure management का खेल !!!!
वह खेल फिर दोहराया जा रहा है, ज्योति अब पासवान हो गई है, नए कपड़े नए साइकिल मिल गई है, नेता जो पूरी त्रासदी मैनेज करने में विफल रहे वह आप अपनी दुकान चलाने आएंगे जाती धर्म आदि के नाम पे
ध्यान रहे "मंगरुआ"अभी भी रोड पर हैं,
नेताजी जाल बिछा रहे है
फसना ना फसना अब मंगरुआ और ज्योति के हाथ में हैं
कभी एक 13 साल की बेटी के बाप के हिसाब से सोचना क्या आप ऐसा कर पाएंगे जैसा उस मजबूर बाप ने किया ? नेताजी जब आप उस लड़की को साइकिल या पैसा देने जाएं एक बार जरूर सोचिए गा उसका बाप मजबूर और लाचार क्यों था





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