” चरित्र “…

” चरित्र “
बस यही ज्यादा था राम जी के पास ।
एक इसी फर्क ने राम से बड़े योद्धा, बड़े ज्ञानी, तपस्वी, राम से बड़े शिव भक्त, ऋषि विश्रवा पुत्र लंकेश को हरा दिया ।
जिस दिन हम हिंदू चरित्र निर्माण कर लेंगे, रीड की हड्डी सीधा कर लेंगे उस दिन से रामराज्य समझिएगा ।




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