छात्र आंदोलन की भ्रुण हत्या :…


छात्र आंदोलन की भ्रुण हत्या :
बेरोजगारी उत्पन्न यह आंदोलन स्वतः स्फूर्त expression था, एकदम genuine और राजनीति से परे, हिंसा को नजरंदाज किया जाए तो यह विषफोट होने को ही था
हिंसा को भी क्रिया की प्रतिक्रिया माना जा सकता हैं, बिहार पुलिस राज बन चुका है और हिंसा सरकार की गलती से भी सकती हैं ।

अब सोचिये क्यों और कैसे हुई भ्रुण हत्या :
हमारे यहां मुद्दो की कोई कमी नहीं हैं पर अभाव है सोच का , हमारे कुछ नेता हर उस जगह हवन करने पहुंच जाते है जहा भीड़ होती हैं , मीडिया ये समझती है तथा बखूबी NTPC RRB का simple full form पूछ के पूरे हिंदुस्तान के mobile में पहुंचा देती है की छात्र थे या राजनैतिक कार्यकर्ता

तो आते हैं नेताओं पे : छात्रों का नेतृत्व सही था और आश्चर्यजनक रूप से काफी हद तक digital था, खान sir के नाम से मशहूर व्यक्ति जो काफी रोचक और अच्छे विडियोज के लिए जाने जाते है उनका बिहार बंद में छात्रों का भाग न लेने का अपील उनकी पॉजिटिव सोच को झलकाती हैं।
हमेशा से जब भी छात्रों आमजनों का कोई भी आंदोलन सफल होने को रहता है तो तमाम विपक्षी पार्टी आंदोलन को हाईजैक करके श्रेय लेने पहुंच जाते हैं , जो की वर्तमान आंदोलन में नहीं हो पाया अब पार्टियां छात्रों को गाली दे रही है। जो कि उनकी मानसिकता को दर्शाता है।

विपक्ष के नेता :
हमारा बिहार व्याकुल भारत से भरा हुआ हैं, जदयू का परिपक्व नेतृत्व इनका इस्तेमाल बखूबी जानता हैं
हमारे एक पूर्व सांसद है जो मक्का क्षेत्र से आते है पर कभी संसद में मक्का के MSP पे सवाल नहीं उठाया , पर जैसे ही भीड़ दिखी किसान आंदोलन पहुंच गए
छात्रों की भीड़ दिखी तो लगे आर पार की लड़ाई लड़ने
कुछ युवा नेता जिन्होंने कभी competitive exam तो छोड़िए college admission form नहीं भरा वो भी अपनी पुरानी arrest की फोटो डाल देते हैं social media पे, विरासत में मिली परिवारवादी सत्ता को ही समाजवाद मानने वालों के नेतृत्व को छात्रों ने ठुकरा दिया और अपने शिक्षको के साथ खड़े रहे ।
छात्र जान गए दो नाव की सवारी में किसकी सवारी करनी है उन्होंने इस बार राजनीतिक से पड़े अपने भविष्य के मध्यनजर सूझबूझ का संदेश दिया है।
UP चुनाव, MLC चुनाव में अच्छे negotiation terms की कोशिश में कुछ blunders करवाए गए हो सत्ता के एक दल के द्वारा तो बहुत आश्चर्य नहीं होगा, दूसरा कोई वजह समझ नही आ रहा छात्रों पे हुए लाठीचार्ज का ,
बिहार में आज की थके हुए नेताओं की फौज भी छात्र आंदोलन से हैं
खैर जो हुआ अच्छा हुआ , पर सत्ता इसे सिर्फ एक इशारा समझे , अगर रोजगार पे काम नहीं हुआ तो ये एक time bomb हैं जो सत्तापक्ष बखूबी जानती है जब जब छात्रों ने हुँकार भड़ी है देश की राजनीति में भूचाल आया है और वर्तमान बिहार सरकार भी छात्र आंदोलन से ही उत्पन्न है।
संजीव श्रीवास्तव
रोजगार उत्प्रेरक




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