जब जातिवाद का नग्न-नृत्य,


जब जातिवाद का नग्न-नृत्य,
देवों के प्रति वाचिक कुकृत्य,

पद्मिनी पूज्य अपमानित हों,
सत्ता निःसत्व प्रमाणित हो

जब जन-मानस अकुलाता है.
परिणाम यही फिर आता है.
– अरविंद पांडेय जी के कलम से
Arvind Pandey



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