तंत्र और सेवक राक्षस बनते जा रहे है…

तंत्र और सेवक राक्षस बनते जा रहे है
और युद्ध – “धर्म युद्ध” बनता जा रहा है





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3 thoughts on “तंत्र और सेवक राक्षस बनते जा रहे है…

  1. बहुत ही निंदनीय और मर्माहत करने वाला । जय हिंद सर।

  2. जो भी व्यक्ति इस मौत के लिए जिम्मेवार है , जांच कर उसे सजा मिलनी चाहिए।

  3. मन खराब हो जाता है ऐसी ह्रदय विदारक समाचार से क्योंकि मैंने नजदीक से देखा है वेतन आदि को वलंबित करने के खेल को

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