निर्भया फंड का 92% अभी भी unused है, ध्यान रहे बिहार में भी शायद उसका कोई उपयोग

निर्भया फंड का 92% अभी भी unused है, ध्यान रहे बिहार में भी शायद उसका कोई उपयोग नहीं हुआ है
पहले हम पुलिस के उदासीन रवैया से दुखी थे
फिर हमेशा कंप्लेंट्स आती रही की FIR नहीं लिखे जाते
तीन तीन साल तक FIR's पेंडिंग पड़े रहते हैं कोई एक्टिविटी नहीं होती
ध्यान से देख ले तो बिहार के हर थाने में लाखों FIR's पेंडिंग है
मैं समझता हूं पूरे देश के यही हालात होंगे
पुलिस की गतिविधि चाहे किसी भी कारण से हो कभी भी संतोषप्रद नहीं रही
करप्शन जीवन का अंग बन गया
कमिटमेंट लेवल के अभाव में धीरे धीरे सिर्फ आम शहरी के लिए ही पुलिस का खौफ रह गया क्रिमिनल्स बेखौफ होते चले गए
फिर आया दौर मोब लिंचिंग का जिसे हमारी मीडिया ने हिंदू-मुस्लिम का रूप दे दिया, मुझे याद है मॉब लिंचिंग तो गांव में पहले भी होती थी तब हिंदू-मुस्लिम नहीं होता था सिर्फ चोर और गांव वाले होते थे
पुलिस की ऐसी हालत में मोहनिया जैसी घटनाएं नहीं होंगी तो क्या होगी
हम उस देश के निवासी हैं जहां स्त्री सम्मान के लिए महाभारत और रावण युद्ध हुआ है
पता नहीं यह मोमबत्तियां किस ने पकड़ा दीया हमको
स्त्री सम्मान में मेरे हिसाब से मॉब लिंचिंग जस्टिफाइड और अब अगर ऐसा ना हुआ तो यह क्रंदन धीरे धीरे सबके घर पहुंचेगी




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2 thoughts on “निर्भया फंड का 92% अभी भी unused है, ध्यान रहे बिहार में भी शायद उसका कोई उपयोग

  1. मोब लिंचिंग में बहुत सारे निर्दोष भी मारे गए हैं जिनके बारे में वॉट्सएप से अफवाह फैलाया गया था।

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