नीचे वाले अखबार ध्यान से पढ़िए हिंदुओं के खून से सना हुआ है,…

नीचे वाले अखबार ध्यान से पढ़िए हिंदुओं के खून से सना हुआ है,
पर क्या इसे मुसलमानों में बहाया है ? नहीं बिलकुल नहीं
इसे कहते हैं पॉलिटिकल ब्रिलियंस वैसे आप इसे हिंदुस्तानी पब्लिक का चुटियापा भी कह सकते हैं
नहीं यह खून उन राजनीतिक पार्टियों ने बहाया है जिन्होंने तुष्टीकरण की राजनीति को अपनाया था
इस पुराने अखबार में कुछ राजनीतिक परिवारों तथा कुछ राज्यों के नाम आप पढ़ पाएंगे, पूरा फ्रंट पेज भरा हुआ है इनसे और कितनी लाशें कहां गिरी लिखा हुआ है
जरा इन नामों और पॉलीटिकल पार्टीज पर गौर फरमाइए आज इनका स्टैंड क्या है ?
कुछ कट्टरवादी हिंदू आज कांग्रेस और एनसीपी के गोद में बैठे हैं , बाकी सारी पार्टियों में जिनकी राज्य की सरकारों में यह सारी घटनाएं घटी हैं आज soft हिंदुत्व के साथ है
और हम लोग 1947 के समय की जो नफरत आपस में थी उससे भी ज्यादा नफरत पाले बैठे हैं, सोचिए क्या 1947 के बाद हमारी नफरत घटी थी या बड़ी थी ?
मुसलमानों के तुष्टीकरण पसंद आया और उसके मध्यमवर्ग ने इसके खिलाफ कभी आवाज नहीं उठाई,
किसी भी एनजीओ या पॉलिटिकल पार्टी ने दुनिया के किसी भी कोने में हुए किसी घटना के खिलाफ भड़काया तो उन्होंने रोड पर शक्ति प्रदर्शन किया ? नतीजा आपके सामने हैं
आज मेजॉरिटी अपिजमेंट हो रहा है तो मेजॉरिटी खुश है !!!!!!
हम फिर राजनीति का शिकार हो रहे हैं




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