बिहार मे कार्यपालिका और विधायिका के बीच कभी balance नहीं रहा। लालूजी के वक्त राज…

बिहार मे कार्यपालिका और विधायिका के बीच कभी balance नहीं रहा। लालूजी के वक्त राजनेता और गुंडे हावी थे, अधिकारी खैनी बनाते थे। नीतिश जी के वक्त एक "constable" भी "मंत्रियों " पे भारी हैं , अधिकारी बेलगाम हैं ।
कारण हैं जनता , जो कभी जाति पे कभी अंधभक्ति पे, कभी लहर पे वोट देती हैं। विधायक चुनिए जो विधेयक बनाने के काबिल हो।
सिस्टम को कोई बाहरी व्यक्ति ही संभाल सकता हैं, सिस्टम के अंदर का व्यक्ति change नहीं ला सकता ।
बिहार को गरीब बनाया जा रहा हैं, इस षडयंत्र को समझिए, अपने बच्चो के भविष्य का सोचिए।




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