मुझे…

मुझे
चिंता या भीख की आवश्यकता नहीं घनानंद,
मैं शिक्षक हूँ,
यदि
मेरी शिक्षा में सामर्थ्य है तो अपना पोषण करने वाले सम्राटों का निर्माण मैं स्वयं कर लूँगा।
-चाणक्य
शिक्षक दिवस पर सादर नमन और वन्दन..




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