यह जो पटरी है ना साहब…

यह जो पटरी है ना साहब
इसी से होते हुए मैं शहर आया था
अब रोटी और रोजगार दोनों नहीं रहे
तो यह पटरी नापते हुए घर जाना है……
आने जाने की ट्रेनें बंद है
मालगाड़ी चलेगी बस
साहब को तो जरूरी सामान लगेगा ना ?
मालगाड़ी चलती है
क्योंकि चलते रहे रुपया…..
एक सुबह ये
हमारे ऊपर से गुजर गई !!!!
पटरी के एक तरफ
मैं पड़ा था
दूसरी तरफ रोटी……
किसी ने फेंक दी थी
पेट भरने के बाद ……….
Ranjan Pandey




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2 thoughts on “यह जो पटरी है ना साहब…

  1. मजदूरों और गरीबों के लिए हकीकत में कोई सरकार नही । अत्यंत दुःखद घटना ।

  2. निःशब्द।ये रोटी बहुत कुछ बयाँ करती है

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