“लेकिन नौका तट छोड़ चली,…


“लेकिन नौका तट छोड़ चली,
कुछ पता नहीं किस ओर चली
यह बीच नदी की धारा है,
सूझता न कूल-किनारा है
ले लील भले यह धार मुझे………..

बिहारी होने का अभिशाप
बिहारी::गिरमिटिया






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