शोक समाचार हैं, पर हारिए न हिम्मत, बिसारिए ना हरी का नाम…


शोक समाचार हैं, पर हारिए न हिम्मत, बिसारिए ना हरी का नाम
मैं जो भी लिखने जा रहा हूं अपनी आपबीती लिखने जा रहा हूं तो आप इसे नकार नहीं सकते, ignore कर सकते हैं

एक सियार "हुआं हुआं" करता हैं तो सब करने लग जाते है, और बिहार में तो आपदा हमेशा से अवसर रहा है, बाढ़ सुखाड़ मैनेजमेंट भूल गए क्या ?
जब मंत्री ऐसे ऐसे पोस्ट लिखे जिससे लगे की बहुत scarcity हैं तो panic create होगा ही, यही हैं आपदा में अवसर , SYSTEM ऐसे ही फलता फूलता हैं
अब ध्यान से पढ़िए और उसके बाद विचार कीजिए
शोक समाचार :
1) मेरी बहन , हम 5 भाइयों से बड़ी ,वो कल Military Hospital Agra मैं covid का शिकार हुई,
हिंदुस्तान के सबसे उन्नत hospital system भी नाकामयाब रहे
2) मेरे साडू भाई Nirmal Sharma ex BSF हैं, बताना इसलिए जरूरी है की इलाज इनकी बहन का भी बहुत अच्छा hospital में हुआ, नियति
इसका मतलब बचाव ही इलाज हैं , घर में रहे, सुरक्षित रहे

अब थोड़ा ध्यान दे ,
3) मेरे एक और साडू भाई Manish Priyadarshi के भाई की तबियत खराब हुई, नवादा से पटना पहुंचने तक सिर्फ फोन पर 3 हॉस्पिटल में bed मिला , एक प्राइवेट में admit किए , मुझे नहीं लगा की bed नहीं मिल रहा
4) समझ में ये आया की कई जगह bed हैं पर कई हॉस्पिटल में सिर्फ VVIPS के आने का इंतजार में bed खाली रखे गए हैं जैसे AIIMS, फिर भी हमे bed मिला, बिना ज्यादा हिल हुज्जत, मतलब जितना हल्ला हैं उतना तकलीफ नहीं हुआ
5) मेरे 6 मित्र ठीक होके आए, हालांकि उसमे से Ejaz Hussain भाई के वार्ड में 4 लोग मारे भी गए, उनके वहां रहते हुए , यहां भी system कुछ ऐसा की लाशे बिस्तर पे दिनो तक रह जा रही हैं, और बाहर bed के लिए हल्ला !!! ये समझ के बाहर हैं ? ऐसा क्यों क्या आपदा ही अवसर हैं ?क्या इस समय भी इतना खराब प्रबंधन criminal नही हैं ?
6) facebook के माध्यम से remedisivir इंजेक्शन मिला, एक व्यक्ति से जो शायद डर से खरीद लिए थे की पता नहीं बाद में मिले की न मिले, अब इसका उपाय बताइए और सोचिए उस व्यक्ति ने ऐसा किस डर से किया होगा?
7) ऐसा क्या हुआ हैं की लोग घरों में ऑक्सीजन cylinder रख ले रहे हैं ?
मेटी पत्नी, बच्ची को जब हुआ तो मेरे हितैषी सब घर में cylinder से लेकर सब कुछ स्टॉक करने का सलाह दिया, हां भर बोलना था , मित्र लोग घर को ICU बना देता, वो तो हम पक्का देहाती है जो सिर्फ naturopathy पे विश्वास किए
9) मेरा चचेरा भाई का परिवार, वो स्वयं समीर श्रीवास्तव , मेरा साला , सलहज सब पॉजिटिव है , तो क्या हो गया ? इतनी घबराहट क्यों !!!!!
इतना "हुआं हुआं " किया हैं "सियार " सब की पूछिए मत

अब एक शोक संतप्त परिवार का सदस्य , बीमार परिवार का मुखिया जिसके यहां अभी recovery process on हैं उसका ये मानना हैं मौतें हो रही हैं पर!!!
1) जितना हल्ला हैं वो बनाया हुआ हैं , असल में स्तिथि उतनी विकराल नहीं जितना हुआं हुआं हैं ?
2) इस panic को create करने से फायदा किसका हैं ये सोचिये ?
3) system क्या हैं ?
4) इसका इलाज है या हर vyakti ka अलग इलाज हैं ?

मेरी अपील : घबराए नहीं
" सच हैं विपत्ति जब आती हैं, कायर को जी दहलाती है, सूरमा नहीं विचलित होते क्षण एक नही धीरज खोते"
गुजर जाएगी boss घबराइए मत, जैसा नेता सब चुने है इतना तो भोगना होगा ना, लाशे तो उठानी पड़ेगी पर जरा धीरज धरे और आगे को सोचे अमेरिका नहीं तो ओरिसा ही बने





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