About Sanjeev Srivastwa

About Sanjeev Ji's Life

Family History

29 अप्रैल 1973 को बैरकपुर कैंट, कोलकाता मे जन्मे संजीव श्रीवास्तव एक भारतीय सेना के अधिकारी के परिवार से संबंध रखते हैं जिनके पिता श्री रमापति प्रसाद श्रीवास्तव, इंडियन आर्मी (भारतीय थल सेना) के एक अधिकारी  रह चुके हैं और माता जी श्रीमती सीमा श्रीवास्तव एक होम मेकर हैं । इनकी बड़ी बहन रश्मि श्रीवास्तव हैं जिनके पति राजेश सिन्हा जी भी आर्मी मे लेफ्टिनेंट कोलोनेल (लेफ्टिनेंट कर्नल) हैं । इनके अलावे इनके एक छोटे भाई हैं श्री रोहित श्रीवास्तव जो क्विक हील एकेडमी नाम की एक IT एडुकेशन संबंधी कंपनी में बतौर निदेशक कार्यरत है ।

Childhood Days

बात करें इनकी खुद के प्रारम्भिक शिक्षा की तो इनकी पढ़ाई भारत के विभिन्न स्थानों पर (जहां पर भी इनके पिता जी का स्थानांतरण हुआ) वही के आर्मी स्कूल एवं केन्द्रीय विद्यालय मे पूरी हुई ।

इसके बाद इनहोने सैनिक की ट्रेनिंग भी पूरी की, फिर कई सालों तक बैंक मे बतौर बैंक कर्मी काम किया और जब इस दायरे मे रह कर भी एक चाहत जो की उद्यमिता के बीज को बोने की थी, वो पूरी ना हो सकी तो फिर कई अलग तरह के व्यापार भी किए। जिनमे फ़ाइनेंस, आईटी सिक्यूरिटी, वर्मी कोमपोस्ट आदि के व्यापार शामिल है। जो ओड़ीशा, बंगाल एवं बिहार के विभिन्न जिलों मे विस्तृत हैं ।

Latest Work

कहते हैं ना की “दिल वहीं जा कर मानता है जहां का वो होता है” । आखिरकार पूरे भारत भ्रमण के बाद श्री संजीव ने अपने नवोन्मेष और नवाचार का केन्द्र बनाया अपने खुद की मातृभूमि बिहार को । बिहार आने के बाद उन्होने किसानों को मंच देना शुरू किया । अपने नए नए प्रयोगों को उनके साथ कर के उनको आर्थिक तौर पर मजबूत बनाने का काम किया ।

नीचे मछली ऊपर बिजली जैसे स्कीम को बिहार के किसानो के लिए ला कर उन्होने एक बड़ी सफलता हासिल की, जिसके तहत वो किसानो को सोलर पावर के साथ साथ मत्स्य उत्पादन की भी ट्रेनिंग दे कर उन्हे स्वउद्यमी बनने मे सतसंकल्पित हो कर साथ दिया ।

 

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problems of rural entrepreneurship

इसके अलावा उन्होने मार्केट लिंक्ड मेडिसिनल एंड एरोमेटिक क्लस्टर जैसे अभियानों से कस्टमर (मेडिसिन कंपनी) , स्वउद्यमी एवं किसानो के बीच एक लिंक बॉंडिंग अग्रीमेंट बना कर जबर्दस्त मार्केट प्लान पेश किया। जिसका सीधा फायदा न सिर्फ कंपनी, उद्यमी और किसानो को हुआ बल्कि ऐसे उत्पादों से समाज मे रह रहे लोगो को भी कम कीमत मे औषधियों की भरपाई हुई और उन्हे काफी आर्थिक लाभ हुआ ।

यहाँ से किसानों को एक बुनियादी लाभ देने के बाद भी श्री संजीव श्रीवास्तव का मन नहीं माना और उनमे कुछ और नया करने की उम्मीद जग गयी और फिर उनका विश्वास आसमान छूने लगा । उन्होने तब आईपीसीए लैब के लिए आर्टीमिसिया एनुअल कल्टीवेशन जैसे प्रयोगों को पूरे बिहार मे करवाया । 

इसी दौड़ान श्री संजीव श्रीवास्तव को राज्य नव प्रवर्तन परिषद (स्टेट इनोवेशन काउंसिल) बिहार की सदस्यता मिली और अब वो बिहार राज्य के इनोवेशन काउंसिल मे भी अपने अहम विचारों को साझा करने लगे ।रजत क्रान्ति से तो हम सब परिचित है जो अंडा उत्पादन के क्षेत्र मे अभी तक की सबसे बड़ी क्रान्ति रही है ।

लेकिन श्री संजीव श्रीवास्तव के बिहार आने के बाद ऐसा लगा मानो बिहार मे अंडा उत्पादन के क्षेत्र में रजत क्रान्ति जैसी क्रान्ति की लहर दौड़ गयी हो । अचानक से पिछले कुछ सालों मे बिहार मे अंडा उत्पादन में 400% की वृद्धि हुई और उसके पीछे छिपा चेहरा और कोई नहीं बल्कि वही हरफनमौला व्यक्तित्व है जिसका नाम है संजीव श्रीवास्तव ।

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अंडा उत्पादन के क्षेत्र मे आने की वजह जाने तो उनके अनुसार वो तीन मुख्य वजहों पर प्रकाश डालना चाहे:

“ पहला – की अंडा कैश मे बिकता है। दूसरा – कृषि से संबन्धित प्रॉडक्ट है और हमारे पास बिहार मे कृषि छोड़ कर कुछ खास नहीं है जिसमे हम नए प्रयोग करें । और तीसरी मुख्य वजह ये है की – 2 करोड़ 80 लाख अंडा तमिलनाडु और पंजाब से निर्यात होता है बिहार के लिए, तो वहाँ के अंडा व्यापारी, और किसान पैसे कमाते हैं। जबकि उन राज्यों में अंडा उत्पादन में अधिकांश कामगार बिहार के होते हैं।वहीं तमाम संसाधनों के बाद भी बिहार में अंडा उत्पादन नहीं हो पा रहा था |

अंडा उत्पादन का क्षेत्र रोजगार देने के मामले में भी अव्वल है। लिहाजा जिन राज्यों में अंडा उत्पादन होगा रोजगार की संभावनाएं भी बेहतर होगी। इन सब बातों पर गहन अध्ययन करने के बाद एक निर्णय तक पहुंचे की अंडा से ही यहाँ के किसानों को फायदा दिलाना है । कुछ हद तक ही बिहार से बेरोजगारों का पलायन रोकना है। तब बात आयी इसके इको सिस्टम को स्टडी करने की। जब इस पर  ज्यादा रिसर्च किया तो पाया की बिहार के किसानों को बैंक से लोन नहीं मिल पा रहा है। ढंग का टेक्निकल ट्रेनिंग नहीं मिल पा रहा है। सपोर्ट की भी कमी है।  फिर मैंने इन सब बातों के लिए हल निकालना शुरू किया तो पाया की बिहार मे कार्टन भी उपलब्ध नहीं है। उसकी फैक्ट्री भी लगानी है, ट्रेड मील लगवाने होंगे । फिर मैंने कुछ प्रबुद्ध लोगों के साथ मिल कर प्रोजेक्ट बनाया और बिहार के हर ज़िले के किसानों से मिल कर उन्हे जागृत करने निकल गया । सेमिनार के माध्यम से, मीटिंग्स के माध्यम से, गाँव गाँव हर ज़िले मे जा कर अंडा उत्पादन के जागृति की लहर दौड़ाई ।

ये तो है बड़े किसानों के लिए जो कम से कम 18 सप्ताह तक मुर्गियों को रख कर पाल सके लेकिन जो छोटे किसान नहीं कर सकते हैं । तो मैंने सोचा की यदि बड़े किसान 18 हफ्तों तक यदि पाल ले मुर्गियों को और अपना मुनाफा रख कर छोटे किसानों से वो मुर्गियों को बेच दे तब छोटे किसान कम से कम रोज़ का 250 रुपया आसानी से कमा सकते हैं । तब के लिए हमने एक छोटा प्रोजेक्ट चलाने का निर्णय लिया साथ साथ । उसके बाद हमने ट्रे फैक्ट्री, कार्टन फैक्ट्री, लगवाए, स्किल डेव्लपमेंट के क्षेत्र मे इसके लिए विशेष केंद्र खुलवाए सभी जिलों के साथ मिल कर । ” 

बताते चले की श्री संजीव के प्रयासों से अंडा प्रचूरता अभियान चलाया जा रहा हैं जिसके माध्यम से संजीव श्रीवास्तव ने ना सिर्फ बड़े स्तर के किसानों के बारे मे सोचा बल्कि उन्होने छोटे स्तर के किसानो की कायापलट करने के बारे मे भी सोचा । और तब निकल के आई की क्रान्ति की लहर जिसे अंडा प्रचूरता अभियान का नाम दिया जा रहा है ।

जहां बड़े किसान बड़े सिस्टम का हिस्सा बन रहे थे वहीं 2 लाख की संख्या मे छोटे किसानो को अंडा प्रचूरता अभियान से जोड़ कर उन्हे 250 मुर्गी पालन को प्रेरित कर के प्रति महीने आसानी से 10,000 से 15,000 तक की कमाई का रास्ता ढूंढ निकाला श्री संजीव श्रीवास्तव ने ।

आगामी परियोजनाओं के बारे मे पूछने पर श्री संजीव बताते हैं की वो A2 मिल्क प्रॉडक्शन (देशी गाय के दूध उत्पादन) पर काम कर रहे हैं और जल्द ही उसका भी इको सिस्टम तैयार होने वाला है। जिससे किसानो को तो फाइदा होगा ही आम जनों तक आसानी से शुद्ध देशी गाय का दूध भी पहुँच पाएगा । साथ ही श्री संजीव श्रीवास्तव जल्द ही स्टार्ट अप इंडिया के तहत एक इन्क्युबेशन सेंटर स्थापित करने जा रहे हैं जिसके अंदर 4-5 की संख्या मे गिने चुने चुनिन्दा स्टार्ट-अप को मार्गदर्शन सह सलाह उन्ही के क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा प्रदान किया जाएगा और स्टार्ट अप को वित्त पोषण (seed funding) भी प्रदान की जाएगी जिसकी मदद से वो एक अच्छा उद्यम स्थापित कर सके ।।   जय प्रगतिशील किसान।।।

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