Pawan Toon एक कहावत है "मियां के पाई ना , बीवी के बखोटी" : सिर्फ ने…

Pawan Toon एक कहावत है "मियां के पाई ना , बीवी के बखोटी" : सिर्फ नेता को engage करने से असल मुजरिम बरी हो जायेंगे , कार्यपालिका और विधायका का balance जो लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी है पिछले 30 साल में कभी नहीं रहा , पवन भाई आप बुद्धिजीवी व्यक्ति हैं और समाज को दिशा बुद्धिजीवी ही देते हैं, में उद्वेलित हूं दूसरे picture से,post के आखिर में उसपे लिखूंगा ।
सभी बुद्धिजीवियों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि वह असल कारण को ना छोड़े ,हमारी दुर्दशा का असल कारण है हमारे "अधिकारी" , और उसके बाद परिस्थिति के मुख्यमंत्री और नेता विधायक , नेता का क्या है खुद नीतीश कुमार के अंदर कोई merit नहीं है , हमारे समाज को जात पात धर्म में इतनी बुरी तरीके से बांटा गया है कि 2020 में जब लोग 1200 से 1500 किलोमीटर पैदल चलकर आए उसके बावजूद भी वोटिंग में भाजपा और नीतीश कुमार की सरकार बन गई, सबसे ज्यादा सीटें होते हुए भी भाजपा नीतीश के नेतृत्व में सरकार बनाने पे मजबूर हुई,OPTIONLESS BIHAR !!!!!! Why ?
कुछ भी घटना घटे तो हम सबसे पहले नेताओं के खिलाफ बोलते हैं , अधिकारियों के खिलाफ क्यों नहीं ? TARGET होने के डर से ?
कोई घोटाला हो जाए हम पार्षद, मुखिया नेता को दोष देते हैं, सबसे पहले इन पर गाज गिरती है क्या अधिकारियों का कोई दोष नहीं है क्या अधिकारियों ने इन लोगों को दलाल नही बना रखा है अपना कलेक्शन करने के लिए !!!!
बिहार सबसे ज्यादा IAS पैदा करता है और यही शायद हमारा दुर्भाग्य का कारण है, हम लोगो को इस मोह से बाहर आना होगा क्योंकि इनमें से 95% ऑफिसर सिर्फ dignified unproductive clerk's होते हैं , clerical activity से ऊपर उठकर कुछ नहीं कर सकते
रिटायरमेंट के वक्त अगर इनसे पूछा जाए कि आपका अचीवमेंट बताइए, कोई एक ऐसी गतिविधि बताइए जिससे समाज को बहुत फायदा हुआ है तो यह लोग मुंह छुपा ले
लालू काल में विधायिका कार्यपालिका पर चढ़ी रही, DM तक का मर्डर हो जाता था IPS को पीट दिया जाता था तथा ये लोग खैनी बनाते थे
नीतिश के टाइम पर उल्टा हो गया , यहां मंत्री अपने विभाग में काम नहीं करा पाता है
यह बैलेंस बनाना मुख्यमंत्री का काम था , जिसमें वह बुरी तरह फैल रहे, मेरा अनुरोध है समाज के सारे पत्रकार एवं अन्य बुद्धिजीवियों से कृपया अधिकारियों पर सवाल शुरू करें
परसों SSP साहब खड़े होकर लोगों को पिटवा रहे थे, पॉकेट में हाथ डाल के, क्या वह बताएंगे कि वह जहां जहां SP या SSP रहे वहां 90 दिनों में कितने FIR का निष्पादन हुआ ?
बिहार में बहुत हाई प्रोफाइल मर्डर हुए उसमें से कितना है यह solve कर सके ?
RTI activist लोगों से मेरा अनुरोध है कि आप लोग उन basic चीजों पर RTI लगाना शुरू करें जहां से हमारी राजनीति खराब होती है
हमारी राजनीति सबसे पहले खराब होती है "थाना की पैरवी" से जिसकी वजह से अच्छे लोग वहीं से बाहर हो जाते हैं, आइए सबसे पहले हम लोग वहीं से गतिविधि शुरू करें पता तो चले कि हमारी पुलिस क्या कर रही है उसके बाद पंचायती राज , कृषि बहुत subject है , मगर इन अधिकारियों पर अगर लोकतंत्र ने अपना अधिकार नहीं जताया तो बिहार कभी नहीं सुधरेगा
अब जरा दूसरी तस्वीर देखिए ASC यानी Army Supply Corps के कुछ साथी कही पे civil administration का काम कर रहे हैं, क्यों ? एफिशिएंसी और प्लानिंग की उम्मीद हमे civil administration से क्यों नहीं हैं ? पैसा ज्यादा उनको और सारा काम फौज का ?
Supplies का रोल शरीर में नश का जैसा होता है , में जनता हूं ASC वाले साथी सारी तैयारी के साथ काम कर रहे होंगे पर हम अपनी सेना को क्यों EXPOSE कर रहे हैं ? वो भी SERVICES, MEDICAL ऐसे Corps को ? जो सारी सेना के संपर्क मे आते हैं ?
इन अधिकारीयों के निक्कमेपन की वजह से !!!!!!
देश बचाइए, सही लोगो पे प्रश्न चिन्ह लगाइए




Source

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *