Write up 5 :…


Write up 5 :
Social media and the Israel Impact क्या सच में हिंदू अब हुनूद बन रहा हैं , किसकी जीत है ये ? क्या मुसलमान ऐसे हार नहीं रहा और हर दिन इसराइल जीत नहीं रहा मुसलमानो के दम पे ? क्या secularism अब इस मुल्क में संभव नहीं हैं ? क्या राजनीती में संघर्ष की जगह धर्म के short cut ने ले लिया हैं ?

हिंदुस्तान का सोशल मीडिया दो खेमों में बटा हुआ है एक होता है भक्त या अंधभक्त और दूसरा है गुलाम
यह ज्यादा प्रचलित नाम है otherwise और भी बहुत सारे नाम है इसी दो खेमों के जो काफी insulting and deragatory भी होते हैं,
एक तीसरा खेमा है जो नक्कारखाने में तूती की आवाज हैं , वो बेचारा सबसे ठगा महसूस करता हैं और उसकी जनसंख्या डेली कम होती हैं, कभी सोशल मीडिया, कभी टीवी debates और कभी physical activities से, आज यही देखा जाए

इस इजरायल पलेस्टाइन मामले में जो सबसे खतरनाक बात सामने निकल कर आई है वह यह है की मोदी जी भले ही पलेस्टाइन के साथ खड़े हो भक्त पूरी तरीके से इजरायल के साथ है !!!
गुलाम अपनी जगह कायम है , आप इसे मामूली बात ना समझे ,

अब आते हैं उस trigger पे जहां से यह यहूद और हुनूद की कहानी शुरू हुई , क्या सच में हिंदू अब हुनुद बन रहा है
जवाब अगर हां नही है तो न भी नहीं हैं, क्या वापसी की कोई आश हैं ? क्या गंगा जमुनी तहजीब जामुन खो जायेगी ?
शायद हां , अब अगर इसे कोई बचा सकता है तो सिर्फ मुसलमानो का मिडल क्लास नहीं तो ये अब असंभव हैं
Appeasement के 70 सालों ने हमारे social fabric को बहुत नुकसान पहुंचाया है, उससे भी ज्यादा नुकसान हमें पहुंचाया है lampat intellectuals और दाढी वालो ने जिन्हे depository of knowledge मान लिया गया था , और उसके बाद के सालों के provocative reactions on everything ने ।
इसका reaction 2014 में सबने महसूस किया , और ये घट नहीं रहा, क्यों नहीं घट रहा इसका कारण हैं जरूरत से ज्यादा insulting approach of both the sides on social media, and 10 TV channel पे 4 घंटा रोज के हिसाब से बजने वाले मुस्लिम मौलवी, दूसरे पक्ष का नाम नहीं लूंगा क्योंकि उनका काम हैं राजनीति वो कर रहे है ।
इसके अलावा physical घटनाए जिन्हे नए उभरने वाले नेता बहुत पसंद करते हैं, मेहनत, दिमाग सोच कुछ नहीं चाहिए : development, एकता, इतना मेहनत क्यों ?

झारखण्ड में चोरी के इल्जाम में पिटाई धार्मिक हो गई, अजहरुद्दीन धार्मिक एंगल की वजह से क्रिकेट से गए,
हिंदुओ की अपनी कहानी हैं, lynching आम हो गई है, कानून सबके पॉकेट में हैं ।
म्यांमार में रोहिंग्या पिटायेगा अमर जवान ज्योति बंबई की तोडी जायेगी , Palestine में कुछ होगा उम्माह की muslim brotherhood की बात की जाएगी
दिल्ली देंगे में फिलीस्तीन मॉडल गुलेल निकलेंगे !!!! अब क्या ?
इसराइल मॉडल mob control होगा, justified भी होगा, हिंदू मुस्लिम भाईचारे पे बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह लग गया हैं, और ये हिंदू मुस्लिम नहीं इस्लाम vs rest of the world हो गया हैं
दे रहा हु कुछ रिपोर्ट पड़ लिया जाए France aur German की तैयारी, Israel मे तो जल रहा हैं

https://www.bbc.com/news/world-europe-56899765

50% हिंदुओं को 70 सालों के विभिन्न प्रदर्शन से यह पूर्ण विश्वास हो गया है कि मेरा पड़ोसी रोहिंग्या और Palestine के लिए मेरा अपना घर बर्बाद कर सकता हैं, दुनिया में कहीं भी मुसलमान पे अत्याचार होगा तकलीफ hindustan को झेलनी होगी ,मीडिया ने भी बड़े जोर शोर से दंगों को और दंगे के हथियारों को फिलिस्तीन से प्रेरित दिखाया, यही हैं हुनूद होना
हिंदुओं को लगता है की मुसलमानों के लिए ज्यादा जरूरी उनका मुस्लिम ब्रदरहुड है, इंडिया सेकंड आता है, और ऐसा एहसास दिन प्रतिदिन बढ़ता जाता है जिसके लिए दोषी सिर्फ और सिर्फ नए नेता हैं, जिन्हे अपनी जगह बनानी है, दोनो तरफ के

यहूदी को आप जीता रहे है हिंदू को हुनुद बना के , एक अजीब सी सोच है जिसे कहते है AGGRESSION , आपके लिए भावना हो सकती है पर aggression एक सोच है एक हथियार है, उदाहरण के तौर पर समझ ले यहूदी फिलिस्तीनीयों को provoke करता है, वो पहले पत्थर चलाते हैं फिर हमास आ जाता है रॉकेट लेकर , पर हर बार अपनी जमीन हार जाते हैं और इजराइल का एरिया बढ़ जाता हैं, सारी मुसलमान ताकतें मिल के भी उससे 6 दिन नहीं लड़ पाती !!!!!!! विश्व भी कुछ नहीं कर पाता , क्या बोलेगा कोई की ठीक हैं रॉकेट खा लो पर उसे मत मारो ?

अपनी चिंता कीजिए, यही स्वभाव रहा अगर पूरी दुनिया में तो सिविल वर दूर नहीं यही लक्ष्य है इजराइल का,
और मेरी चिंता यह है कि उस समय इसराइल हमारा नंबर वन दुश्मन होगा, मेरी वजह से नहीं, write up 6 में लिखूंगा कि वह क्यों हमारा नंबर वन दुश्मन होगा

अब ऐसे में रोल आता है middle class मुसलमान का जिसकी बात समाज में सुनी जाती है, सबसे पहले तो उनको यह मानना होगा कि जब rampant appeasement हो रहा था तब घर में बैठकर भले ही आप लोग आलोचना करते हो और उसके दूरगामी नतीजों पर चिंता करते हो मगर खुल के आप लोगों ने विरोध नहीं किया, नतीजा आज आपके सामने हैं,आज विरोध कीजिए हर उस मौलवी का जो टीवी में बैठ कर के तुक्ष बातें बोलता है, हर उस नेता और मौलवी का जो सोशल मीडिया में जहर घोलता है ,इस तरह से धीरे-धीरे आप दो कदम आएंगे हम चार कदम आएंगे तब जाकर के सेकुलरिज्म सांस लेगा, नहीं तो वेंटिलेटर पर हैं सेक्युलरिज्म सबसे जरूरी समाज में aggression के प्रदर्शन को कम करवाइए

लोकतंत्र में राजनैतिक विश्वाश जितना होगा , जो किसी पार्टी को support कर के या किसी व्यक्ति का विरोध करके नहीं होगा, आज तो नहीं है मोदीजी तो भी देश क्यों बटा दिख रहा हैं ?
कल और कट्टरता नहीं फैलेगी इसकी कोई गारंटी ?
कल germany की तरह bikers gang और France ki तरह veterans group हथियार नहीं उठाएंगे इसकी कोई गारंटी !!!!!!
तहजीब बचानी है तो मेहनत कीजिए
अगला हमे क्यों चिंतित होना चाहीए इसराइल से ????







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